
पीलीभीत। भारत के संविधान निर्माता, सामाजिक न्याय के महान योद्धा और भारत रत्न डॉ. भीमराव आंबेडकर की 134वीं जयंती के अवसर पर विकासखंड पूरनपुर की ग्राम पंचायत चतीपुर में एक भव्य और भावपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस गरिमामय आयोजन की अगुवाई पूर्व जिला पंचायत सदस्य श्री सोनपाल गौतम ने की।कार्यक्रम में ग्रामीणों का उत्साह देखते ही बनता था। बाबा साहेब की प्रतिमा पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। इस दौरान स्थानीय विद्यालयों के छात्र-छात्राओं द्वारा प्रस्तुत की गई देशभक्ति और सामाजिक संदेशों से युक्त सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने माहौल को भावुक कर दिया।
बाबा साहेब का योगदान सिर्फ संविधान निर्माण तक सीमित नहीं था, वे आजीवन सामाजिक अन्याय, अस्पृश्यता और जातीय भेदभाव के खिलाफ संघर्ष करते रहे। उन्होंने न केवल दलितों के अधिकारों के लिए आवाज उठाई, बल्कि महिलाओं, श्रमिकों और वंचित वर्गों को भी बराबरी का दर्जा दिलाने में अहम भूमिका निभाई। संविधान निर्माण के समय, जब देश एकजुटता की ओर बढ़ रहा था, बाबा साहेब ने एक ऐसा संविधान रचा जिसमें सभी नागरिकों को समान अधिकार, स्वतंत्रता और न्याय की गारंटी दी गई।
उन्होंने शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का सबसे बड़ा हथियार माना और कहा –
“शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो।” पूर्व जिला पंचायत सदस्य सोनपाल गौतम ने अपने उद्बोधन में कहा –
“आज हम जो भी संवैधानिक अधिकारों का लाभ ले रहे हैं, वे बाबा साहेब की दूरदर्शिता का परिणाम हैं। उनकी सोच, उनका त्याग और उनका संघर्ष भारत की आत्मा में समाया हुआ है। ऐसे महामानव को याद करना, उनके बताए रास्ते पर चलना ही सच्ची श्रद्धांजलि है।”
इस अवसर पर कई समाजसेवियों, शिक्षकों और जनप्रतिनिधियों ने बाबा साहेब के जीवन और उनके आदर्शों पर अपने विचार रखे। साथ ही यह भी संकल्प लिया गया कि गांव में शिक्षा, जागरूकता और सामाजिक समरसता के क्षेत्र में निरंतर काम किया जाएगा। कार्यक्रम के अंत में बाबा साहेब के जीवन पर आधारित वृत्तचित्र का प्रदर्शन किया गया, जिसने उपस्थित लोगों को उनके संघर्ष और उपलब्धियों से रूबरू कराया। समापन पर उपस्थित सभी लोगों ने संविधान की रक्षा और समानता की शपथ ली। यह आयोजन न सिर्फ श्रद्धांजलि थी, बल्कि एक सामाजिक चेतना का संदेश भी – कि जब तक समाज में असमानता है, तब तक बाबा साहेब के विचार प्रासंगिक रहेंगे।









